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भारत के राज्य और उनकी राजधानी

  भारत के राज्य और उनकी राजधानी भारत में 2020 से पहले 29 राज्य और 7 केंद्र शासित राज्य (Union Territories State) हुआ करते थे| लेंकिन 2020 के बाद जम्मू-कश्मीर को लेकर बढ़ते आतंक को रोकने के लिए माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर को दो अलग-अलग केंद्र शासित राज्य लद्दाख और जम्मू में विभाजित किया गया है| वर्तमान समय में भारत में केंद्र शासित राज्य की संख्या 8 है और स्वतंत्र राज्य की संख्या 28 है|  राज्य और उसकी राजधानी राज्य राजधानी आंध्रप्रदेश अमरावती बिहार पटना असम दिसपुर अरुणाचल प्रदेश ईटानगर झारखण्ड रांची हिमाचल प्रदेश शिमला हरियाणा चंडीगढ़ गुजरात गाँधी नगर गोवा पणजी छत्तीसगढ़ रायपुर नागालेंड कोहिमा मिजोरम आइजोल मेघालय शिलोंग मणिपुर इम्फाल महाराष्ट्र मुंबई मध्य प्रदेश भोपाल केरल तिरुवनंतपुरम कर्नाटक बंगलुरु पश्चिम बंगाल कोलकाता उतराखंड देहरादून उत्तर प्रदेश लखनऊ त्रिपुरा अगरतल्ला तेलंगाना हैदराबाद तमिलनाडु चेन्नई सिक्किम गंगटोक राजस्थान जयपुर पंजाब चंडीगढ़ ओडिशा भुवनेश्वर केंद्र शासित प्रदेश और उसकी राजधानी केन्द्रशासित प्रदेश राजधानी अंडमान और निको...
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भारतीय अर्थव्यवस्था परिवर्तन के शिखर पर

  भारतीय अर्थव्यवस्था परिवर्तन के शिखर पर जी. श्रीनिवासन         एक दशक के बाद मई 2014 में एनडीए सरकार के कार्यभार संभालने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था आज एक अनुकरणीय मामला प्रस्तुत कर रही है कि किस प्रकार बिना किसी हायतौबा मचाए प्रभावी रूप से कार्य किया जा सकता है। सरकार ने तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है और यह बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम 2016, रीयल इस्टेट सेक्टर और पिछले नवंबर में कालेधन धारकों पर एक बड़ी कार्रवाई के रूप में पांच सौ और एक हजार रुपये के बड़े नोटों के विमुद्रीकरण सहित बैंकिंग और कॉरपोरेट क्षेत्र में बड़े आर्थिक सुधार लाने में समर्थ है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि भारत दुनिया में एक सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था वाला देश बना रहा। अनंतिम अनुमानों के अनुसार 2015-16 में सकल घरेलू उत्पाद में 7.9 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि 2014-15 में यह 7.2 प्रतिशत रही थी। यह वर्ष प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के अधीन एनडीए सरकार का शुरूआती वर्ष था। पहले ही वर्ष में अर्थव्यवस्था को विरासत में मिले मुद्दों को सहन करना पड़ा और पिछली सर...

रोजगार के समाधान के लिए कौशल विकास पर है जोर

  रोजगार के समाधान के लिए कौशल विकास पर है जोर आलोक कुमार   प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) देश के करोड़ युवकों को रोजगार मुहैया कराने में महती भूमिका अदा कर सकती है। पीएमकेवाई का मूल चरित्र आजाद भारत के संस्कार पुरुष महात्मा गांधी के सपनों के अनुरुप है। गांधी जी ने हुनरमंद होने की पुरजोर पैरवी की थी। उनका अपना काम खुद करने पर सर्वाधिक विश्वास था। पीएमकेवीवाई की इमानदार पहल से सरकार की ओर से हुनरमंद तैयार करने के लिए पहले चरण में प्रशिक्षण केंद्रों की बाढ़ आ सकती है। फिर अगले चरण में उससे प्रशिक्षित होकर निकलने वाले हुनरमंदों की फौज खड़ी हो सकती है। ये प्रशिक्षित लोग सरकार की ओर से प्रदत ऋण योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार खड़े कर सकते हैं। पीएमकेवाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्किल इंडिया और स्टैंड अप इंडिया का अहम हिस्सा है। जिसके सहारे दुनिया भर में मेक इन इंडिया का डंका बजाना है। पीएमकेवीवाई को प्रभावी बनाने के लिए बीते नबंवर में नए सिरे से लॉच किया गया है। इसमें कई अहम बदलाव किए गए हैं। जैसे हर पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण केंद्र पर आधार बायोमेट्रिक्स और सीसीटीवी से...

रोजगार के समाधान के लिए कौशल विकास पर है जोर

  रोजगार के समाधान के लिए कौशल विकास पर है जोर आलोक कुमार   प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) देश के करोड़ युवकों को रोजगार मुहैया कराने में महती भूमिका अदा कर सकती है। पीएमकेवाई का मूल चरित्र आजाद भारत के संस्कार पुरुष महात्मा गांधी के सपनों के अनुरुप है। गांधी जी ने हुनरमंद होने की पुरजोर पैरवी की थी। उनका अपना काम खुद करने पर सर्वाधिक विश्वास था। पीएमकेवीवाई की इमानदार पहल से सरकार की ओर से हुनरमंद तैयार करने के लिए पहले चरण में प्रशिक्षण केंद्रों की बाढ़ आ सकती है। फिर अगले चरण में उससे प्रशिक्षित होकर निकलने वाले हुनरमंदों की फौज खड़ी हो सकती है। ये प्रशिक्षित लोग सरकार की ओर से प्रदत ऋण योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार खड़े कर सकते हैं। पीएमकेवाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्किल इंडिया और स्टैंड अप इंडिया का अहम हिस्सा है। जिसके सहारे दुनिया भर में मेक इन इंडिया का डंका बजाना है। पीएमकेवीवाई को प्रभावी बनाने के लिए बीते नबंवर में नए सिरे से लॉच किया गया है। इसमें कई अहम बदलाव किए गए हैं। जैसे हर पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण केंद्र पर आधार बायोमेट्रिक्स और सीसीटीवी से...

भारतीय रेल का बदलता स्वरूप

  भारतीय रेल का बदलता स्वरूप * के आर सौदामन   भारतीय रेल के बारे में बहुधा कुछ रोमांचकता रहती है एवं विशेषकर ग्रामीण भारत में हर बच्चा एक ट्रेन अथवा इंजन को देख कर उल्लास और भावना से भरा रहता है। सही बात है कि भारतीय रेल विकास का साधन एवं देश के आर्थिक विकास की रीढ़ हैं। अतएव यह महत्वपूर्ण है कि इसका विकास आर्थिक विकास से कम से कम दो प्रतिशत आगे रहे ताकि समग्र विकास की राह में परिवहन संबंधी ढांचागत रोड़ों का न रहना सुनिश्चित किया जा सके। किंतु दुर्भाग्यवश साल दर साल ख़ासकर गठबंधन सरकारों के दौर में भारतीय रेलवे अनेक राजनीतिक समीकरण साधने की प्रवृत्ति के कारण अनियंत्रित लोकलुभावनवाद का शिकार रहा है ,  जिसका परिणाम इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में पूंजीगत व्यय की अनदेखी के तौर पर हुआ है। इससे भारतीय रेलवे प्रमुख मार्गों के अत्यधिक प्रयोग से चरमराया है। यात्री किराये में भारी छूट से विकास संबंधी गतिविधियों और पहले ही रेल सेवाओं की गिरती स्थिति पर पूंजीगत व्यय के लिये बहुत कम रास्ता छोड़ा है। इस लोकलुभावनवाद के कारण सैंकड़ों परियोजनाएं जिनके लिये शिलान्यास रखा जा चुका था ,  केव...

विज्ञान के लाभ त्व्रित रूप से पहुंचाकर समाज की प्रगति में योगदान

  विज्ञान के लाभ त्व्रित रूप से पहुंचाकर समाज की प्रगति में योगदान *रत्‍नदीप बेनर्जी विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय -  वैज्ञानिक नवोन्‍मेषों को प्रोत्‍साहन देने ,  अंतर-विभागीय समन्‍वयन और वाणिज्‍यीकरण के लिए प्रौद्योगिकीय अंतरण आरंभ करने का मार्ग प्रशस्‍त करने के लिए स्‍टार्ट-अप्‍स को सहायता प्रदान करने वाले अपने त्रि-आयामी दृष्टिकोण के साथ समाज तक विज्ञान के त्‍वरित लाभ पहुंचाने में संलग्‍न है। पिछले तीन वर्षों में इसी दृष्टिकोण के साथ सम्मिलित कार्रवाई की गई है।   वैज्ञानिक नवोन्‍मेष उद्योगों को वैश्विक बाजार में सेंध लगाने तथा उस पर नियंत्रण करने के लिए प्रतिस्‍पर्धा का लाभ प्रदान करने की प्रेरक शक्ति है। भारत सरकार ने जनवरी ,  2016 में प्रमुख पहल  ‘ स्‍टार्ट-अप इंडिया ’  का शुभारम्‍भ किया। प्रधानमंत्री ने स्‍टार्ट-अप इंडिया कार्य योजना की घोषणा करते हुए कहा ,   ‘’  सफल स्‍टार्ट-अप्‍स सामान्‍यत: उन लोगों द्वारा सृजित किए जाते हैं ,  जो किसी विचार या लोगों के समक्ष आने वाली समस्‍या का समाधान करने की इच्‍छा से प्रेरित होते हैं। ‘ ...